रामबांधा तालाब अपनी सफाई की मार्ग मे खुद रोड़ा बन रहा है . प्रकाश स्पंज संयंत्र का लाखों रुपया पानी मे डूबो रहा है .
संवाद यात्रा/जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़/अनंत थवाईत
शीर्षक पढ़कर आप अंचभित होंगे कि राम बांधा तालाब अपनी ही सफाई मे कैसे पानी फेर सकता है? इसका उत्तर आपको उसी स्थान मे जाकर मिल सकता है जिस स्थान पर डेढ़ महीने पहले उमंग उल्लास के बीच विधि विधान और मंत्रोचारण के साथ सफाई अभियान शुरू हुआ था.
प्रकाश स्पंज संयंत्र के आर्थिक सहयोग से पिछले 15 अप्रैल को जांजगीर-चांपा जिले के जिलाधीश एवं पालिकाध्यक्ष तथा जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति मे राम बांधा तालाब के बैगा घाट मे पूजा अर्चना करके सफाई अभियान प्रारंभ किया गया था . नगरवासी इस सफाई अभियान से काफी प्रसन्न थे. और इस नेक कार्य के लिए अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को बधाई दे रहे थे. समाचार पत्रों मे भी इस सफाई अभियान का समाचार जोर शोर से प्रकाशित प्रसारित हुआ था.पर नगर वासियों को शायद यह अंदाजा नहीं था कि उनके बधाई, प्रशंसा और उम्मीदों पर खुद राम बांधा तालाब पानी फेर देगा.और प्रकाश स्पंज संयंत्र का लाखों रुपया पानी मे डूबो देगा .साथ ही कट्टर ईमानदार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों पर सफाई कार्य मे भ्रष्टाचार करने का सवाल भी खड़ा कर देगा.
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि आज की तारीख मे वहां जाकर देखें तो सफाई अभियान शुरू होने के डेढ़ महीने बाद भी वह स्थान जस का तस है. तालाब के घाट पर आज भी कीचड़ और जलकुंभी अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं .कइ ट्रेक्टर जलकुंभी निकालने के बाद भी जलकुंभी सुरसा के मुंह की तरह घाटों की ओर फैल रही है.
राम बांधा तालाब मे सफाई अभियान को देखकर ऐसा लगता है कि मानसून के पूर्व सफाई हो पाना बहुत मुश्किल है. ऐसी स्थिति को देखकर कुछ लोग सफाई अभियान को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाने का आरोप भी लगा सकते हैं.पर स्थिति को निकट से समझने से ऐसा लगता है कि राम बांधा तालाब भी जोर आजमाइश पर उतारू हो गया है और सफाई कार्य के सामने चुनौती बन अड़ा हुआ है.और सफाई का प्रचार प्रसार करने वालों को चिढ़ा रहा है. दरअसल घाटों पर से जेसै ही जलकुंभी को बाहर निकाला जा रहा है वैसे ही हवा के झोंकों के साथ जलकुंभी घाटों के निकट आ जाते हैं और ऐसा लगता है कि सफाई शुरू ही नहीं हुआ है.
तालाब की इस स्थिति पर चर्चा करने से लोगों के भी भिन्न-भिन्न विचार सामने आते हैं . कोई कहता है कि सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है. कोई कहता है कि योजना बद्ध ढंग से सफाई नहीं हो रही है .और इसे स्थायी रुप से चारागाह के रूप मे रखना चाहते हैं. कोई कहता है घाटों पर चार पांच फीट अंदर की ओर लोहे अथवा स्टील की जाल लगाकर घाटों को लोगों के नहाने लायक बनाया जा सकता है.कई लोगों का यह भी मानना है कि जलकुंभी और काई पानी को साफ और ठंडा रखने मे सहायक होते हैं ऐसे मे तालाब से पूरी तरह जलकुंभी को बाहर निकालने का योजना नहीं बनाना चाहिए किन्तु जलकुंभी को नियंत्रित करने के लिए समय समय पर सफाई जरूरी है.














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