सुशील भोले भी चले गए 'सुरता के संसार ' में श्रद्धांजलि आलेख : स्वराज करुण

 

                स्मृति शेष - सुशील भोले जी 

 संवाद यात्रा /जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़/ अनंत थवाईत 

 हे भगवान! ये क्या हो गया?

छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के लिए करीब चार दशकों तक समर्पित रहे लेखक,  कवि और पत्रकार भाई सुशील भोले भी आज  सुरता के संसार (यादों की दुनिया )में चले गए. राजधानी रायपुर में उनका निधन हो गया ।

लगभग तीन साल पहले 7फरवरी 2023 को जब उनका हालचाल जानने मैं कवयित्री अमिता दुबे के साथ उनके घर गया था, तब उन्होंने हमें अपनी पुस्तक 'सुरता के संसार ' की सौजन्य प्रतियाँ भेंट की थी.यह छत्तीसगढ़ी भाषा में उनके 39 संस्मरणों की पुस्तक है,ये संस्मरण छत्तीसगढ़ की महान विभूतियों पर और प्रदेश की सामाजिक -सांस्कृतिक विशेषताओं पर केंद्रित है.  आज से भाई सुशील भी हमारे संस्मरणों में आते -जाते रहेंगे। उन्हें विनम्र नमन.

  सुशील वर्मा (अब सुशील भोले ) ने  दिसम्बर  1987 में छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका ' मयारू माटी ' का सम्पादन और प्रकाशन प्रारंभ करके राज्य निर्माण के लिए साहित्यिक -वातावरण बनाने का प्रयास किया । इस पत्रिका के 13 अंक प्रकाशित हो पाए । आर्थिक दिक्क़तों के कारण इसे आगे जारी रखना उनके लिए संभव नहीं हो पाया ।

वहीं वर्ष 1989 में प्रकाशित उनका काव्य संग्रह 'छितका कुरिया ' भी काफी चर्चित हुआ।उनकी प्रकाशित अन्य छत्तीसगढ़ी कविता -पुस्तकों में 'दरस के साध' और 'जिनगी के रंग' भी शामिल हैं। उनके आलेखों का संग्रह 'आखर अंजोर' मूल संस्कृति पर आधारित है। सुशील भोले की छत्तीसगढ़ी कहानियों का संकलन 'ढेंकी'वर्ष 2009 में 'सृजन संस्थान ' रायपुर द्वारा प्रकाशित किया गया ।

        पिछले कुछ वर्षों से वे अखबारों में 'कोंदा -भैरा के गोठ ' शीर्षक से सम -सामयिक विषयों पर छत्तीसगढ़ी में व्यंग्यात्मक लेखन भी कर रहे थे।यह सीरिज बहुत लोकप्रिय हो रहा था. इसके अलावा उन्होंने कुछ समय से यूट्यूब पर भी छोटी -छोटी छत्तीसगढ़ी कविताओं के साथ अपने विचार व्यक्त करने का सिलसिला भी शुरु किया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ी और हिन्दी के कवियों और लेखकों का एक वाट्सएप ग्रुप 'मयारू माटी ' के नाम से शुरु किया था,नये रचनाकारों को भी इस वाट्सएप मंच में भरपूर स्थान मिलता रहा । उन्होंने वर्षों तक वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार  के सांध्य दैनिक 'छत्तीसगढ़ ' के साप्ताहिक 'इतवारी अख़बार ' में भी सहयोगी सम्पादक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं.सुशील भोले से मेरा लगभग चार दशक पुराना आत्मीय परिचय था. आज वह साथ भी छूट गया।

    छत्तीसगढ़ की साहित्यिक बिरादरी को सिर्फ़ दो सप्ताह में यह दूसरा बड़ा सदमा लगा है । विगत 13 फरवरी 2026 को हिन्दी के वरिष्ठ कवि रंजीत भट्टाचार्य का अपने गृह नगर धमतरी में निधन हो गया और आज 26फरवरी को रायपुर के हमारे साथी सुशील भोले भी दुनिया छोड़ गए । भारी हृदय से विनम्र श्रद्धांजलि ।

        -स्वराज करुण

टिप्पणियाँ

Popular Posts

व्यास कश्यप तो केवल नाम का है असल मे नारायण चंदेल का टक्कर भूपेश बघेल और डा .महंत से है भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग चंदेल को छाया मुख्यमंत्री नहीं, वास्तविक मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहता है ।

छात्रों के लिए परीक्षा ही अंतिम मंजिल नहीं है - श्रीमती अंजना सिंह परिहार बोर्ड परीक्षा के समय छात्रों में उत्पन्न तनाव को शिक्षक पालक मिलकर दुर करें।