जलकुंभी से भरे रामबांधा तालाब के घाटों पर निस्तारी की अस्थाई व्यवस्था
संवाद यात्रा/जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़/अनंत थवाईत
आप लोगों ने तीर्थ स्थलों के नदी ,सरोवरों मे बने घाटों पर लोहे के जंजीरों या बांसों और रस्सियों को देखा होगा यह व्यवस्था लोगों को गहरे पानी मे जाने से रोकने के लिए किया जाता है . ठीक इसी तरह की व्यवस्था इन दिनों रामबांधा तालाब मे की गई है लेकिन यह व्यवस्था लोगों को गहरे पानी मे जाने से रोकने के लिए नहीं बल्कि जलकुंभी को घाटों पर आने से रोकने के लिए बांसों का घेरा बनाई गई है.
दरअसल इन दिनों रामबांधा तालाब जलकुंभी से सुशोभित है और हवा चलने के साथ ही वे घाटों पर आ जाते हैं जिससे नहाने वाले लोगों को असुविधा महसूस होती है .पूरे तालाब से जलकुंभी को हटाना नगरपालिका के लिए चुनौती है क्योंकि इससे पालिका को आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा. इसलिए फिलहाल घाटों मे निस्तारण के लिए यह व्यवस्था की गई है.इस वैकल्पिक व्यवस्था से सबसे अधिक राहत उन लोगों को मिल रही है जो गांवों से अस्पतालों मे अपने परिजनों के इलाज कराने के लिए आते हैं .लायंस चौक से लेकर गौरव पथ तक दर्जन भर से अधिक अस्पताल है.इन अस्पतालों मे मरीजों के साथ सैकड़ों लोगों का आना जाना और रात बिताना होता रहता है. इसके अलावा चौपाटी के पास नायक घाट मे मृतकों के दशकर्म कार्य और नहाने का कार्यक्रम भी चलता रहता है.ऐसे मे लोगो के निस्तारण के लिए यह अस्थाई सुविधा उपलब्ध है.










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